Our Objective

रामा-गौधाम गौ शाला अरेल घाट प्रयागराज

गौ माता की महत्ता कहते हैं कि जो गौमाता के खुर से उड़ी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है, वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है । पशुओं में बकरी, भेड़, ऊंटनी, भैंस का दूध भी काफी महत्व रखता है। किंतु केवल दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण भैंस प्रजाति को ही प्रोत्साहन मिला है, क्योंकि यह दूध अधिक देती है व वसा की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे घी अधिक मात्रा में प्राप्त होता है। 

गाय का दूध गुणात्मक दृष्टि से अच्छा होने के बावजूद कम मात्रा में प्राप्त होता है। दूध अधिक मिले इसके लिए कुछ लोग गाय और भैंस का दूध क्रूर और अमानवीय तरीके से निकालते हैं। गाय का दूध निकालने से पहले यदि बछड़ा/बछिया हो तो पहले उसे पिलाया जाना चाहिए। वर्तमान में लोग बछड़े/बछिया का हक कम करते है। साथ ही इंजेक्शन देकर दूध बढ़ाने का प्रयत्न करते हैं, जो की उचित नहीं है। 

 

प्राचीन ग्रंथों में सुरभि (इंद्र के पास), कामधेनु (समुद्र मंथन के 14 रत्नों में एक), पदमा, कपिला आदि गायों  महत्व बताया है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देवजी ने असि, मसि व कृषि गौ वंश को साथ लेकर मनुष्य को सिखाए। हमारा पूरा जीवन गाय पर आधारित है। शिव मंदिर में काली गाय के दर्शन मात्र से काल सर्प योग निवारण हो जाता है।

 

गाय के पीछे के पैरों के खुरों के दर्शन करने मात्र से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। गाय की प्रदक्षिणा करने से चारों धाम के दर्शन लाभ प्राप्त होता है, क्योंकि गाय के पैरों चार धाम है। जिस प्रकार पीपल का वृक्ष एवं तुलसी का पौधा आक्सीजन छोड़ते है। एक छोटा चम्मच देसी गाय का घी जलते हुए कंडे पर डाला जाए तो एक टन ऑक्सीजन बनती है। इसलिए हमारे यहां यज्ञ हवन अग्नि -होम में गाय का ही घी उपयोग में लिया जाता है। प्रदूषण को दूर करने का इससे अच्छा और कोई साधन नहीं है। 

 

धार्मिक ग्रंथों में लिखा है "गावो विश्वस्य मातर:" अर्थात गाय विश्व की माता है। गौ माता की रीढ़ की हड्डी में सूर्य नाड़ी एवं केतुनाड़ी साथ हुआ करती है, गौमाता जब धुप में निकलती है तो सूर्य का प्रकाश गौमाता की रीढ़ हड्डी पर पड़ने से घर्षण द्धारा केरोटिन नाम का पदार्थ बनता है जिसे स्वर्णक्षार कहते हैं। यह पदार्थ नीचे आकर दूध में मिलकर उसे हल्का पीला बनाता है। इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला नजर आता है। इसे पीने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है। जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों और सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो की वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो हमें समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा। 

 

गौ माता का जंगल से घर वापस लौटने का संध्या का समय (गोधूलि वेला) अत्यंत शुभ एवं पवित्र है। गाय का मूत्र गो औषधि है। मां शब्द की उत्पत्ति गौ मुख से हुई है। मानव समाज में भी मां शब्द कहना गाय से सीखा है। जब गौ वत्स रंभाता है तो मां शब्द गुंजायमान होता है। गौ-शाला में बैठकर किए गए यज्ञ हवन ,जप-तप का फल कई गुना मिलता है। बच्चों को नजर लग जाने पर, गौ माता की पूंछ से बच्चों को झाड़े जाने से नजर उत्तर जाती है, इसका उदाहरण ग्रंथों में भी पढ़ने को मिलता है,  जब पूतना उद्धार में भगवान कृष्ण को नजर लग जाने पर गाय की पूंछ से नजर उतारी गई। 

 

गौ के गोबर से लीपने पर स्थान पवित्र होता है। गौ-मूत्र का पवन ग्रंथों में अथर्ववेद, चरकसहिंता, राजतिपटु, बाण भट्ट, अमृत सागर, भाव सागर, सश्रुतु संहिता में सुंदर वर्णन किया गया है। काली गाय का दूध त्रिदोष नाशक सर्वोत्तम है। रुसी वैज्ञानिक शिरोविच ने कहा था कि गाय का दूध में रेडियो विकिरण से रक्षा करने की सर्वाधिक शक्ति होती है। गाय का दूध एक ऐसा भोजन है, जिसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेड, दुग्ध, शर्करा, खनिज लवण वसा आदि मनुष्य शरीर के पोषक तत्व भरपूर पाए जाते है। गाय का दूध रसायन का करता है। 

 

आज भी कई घरों में गाय की रोटी राखी जाती है। कई स्थानों पर संस्थाएं गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रही है, जो कि प्रशंसनीय कार्य है। साथ ही यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने का आंदोलन, मांस निर्यात नीति का पुरजोर विरोध एवं गौ रक्षा पालन संवर्धन हेतु सामाजिक धार्मिक संस्थाएं एवं सेवा भावी लोग लगातार संघर्षरत है। 

 

दुःख इस बात का भी होता है कि लोग गाय को आवारा भटकने के लिए बाजारों में छोड़ देते है। उन्हें इनके भूख प्यास की कोई चिंता ही नहीं होती। लोगों को चाहिए की यदि गाय पालने का शौक है तो उनकी देखभाल भी आवश्यक है, क्योंकि गाय हमारी माता है एवं गौ रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। 

 

 

गौ माता - क्यों हिंदू मानते हैं गाय को माता

गाय हिंदू समुदाय में माता का दर्जा दिया जाता है, उसकी पूजा की जाती है। ग्रामीण इलाकों में तो आज भी हर रोज खाना बनाते समय पहली रोटी गाय के नाम की बनती है। प्राचीन समय से ही अन्य पालतु पशुओं की तुलना में गाय को अधिक महत्व दिया जाता है। हालांकि वर्तमान में परिदृश्य बदला है और गौ धन को पालने का चलन कम हो गया है, लेकिन गाय के धार्मिक महत्व में किसी तरह की कोई कमी नहीं आयी है बल्कि पिछले कुछ समय से तो गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने तक मांग उठने लगी है। गौहत्या को धार्मिक दृष्टि से ब्रह्म हत्या के समान माना जाता है हाल ही में हरियाणा में तो गौहत्या पर सख्त कानून भी बनाया गया है। आइये जानते हैं गाय को क्यों माता का दर्जा देते हैं हिंदू लोग और क्यों माना जाता है इसे श्रेष्ठ?

 

 

गाय का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

गाय को माता मानने के पिछे यह आस्था है कि गाय में समस्त देवता निवास करते हैं व प्रकृति की कृपा भी गाय की सेवा करने से ही मिलती है। भगवान शिव का वाहन नंदी (बैल), भगवान इंद्र के पास समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली गाय कामधेनू, भगवान श्री कृष्ण का गोपाल होना एवं अन्य देवियों के मातृवत गुणों को गाय में देखना भी गाय को पूज्य बनाते हैं।

भविष्य पुराण के अनुसार गोमाता के पृष्ठदेश यानि पीठ में ब्रह्मा निवास करते हैं तो गले में भगवान विष्णु विराजते हैं। भगवान शिव मुख में रहते हैं तो मध्य भाग में सभी देवताओं का वास है। गऊ माता का रोम रोम महर्षियों का ठिकाना है तो पूंछ का स्थान अनंत नाग का है, खूरों में सारे पर्वत समाये हैं तो गौमूत्र में गंगादि पवित्र नदिया, गौमय जहां लक्ष्मी का निवास तो माता के नेत्रों में सूर्य और चंद्र का वास है। कुल मिलाकर गाय को पृथ्वी, ब्राह्मण और देव का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन समय में गोदान सबसे बड़ा दान माना जाता था और गौ हत्या को महापाप। यही कारण रहे हैं कि वैदिक काल से ही हिंदू धर्म के मानने वाले गाय की पूजा करते आ रहे हैं। गाय की पूजा के लिये गोपाष्टमी का त्यौहार भी भारत भर में मनाया जाता है।

साल 2016 में गोपाष्टमी कब है जानने के लिये यहां क्लिक करें

 

गाय का आर्थिक महत्व

 

प्राचीन काल में तो व्यक्ति की समृद्धि, संपन्नता गोधन से ही आंकी जाती थी यानि जिसके पास जितनी ज्यादा गाय वह उतना ही धनवान, तमाम कर्मकांडो, संस्कारों में गो दान को ही अहमियत दी जाती थी, परिवार का भरण पोषण गाय पर ही निर्भर करता था, खेतों को जोतने के लिये बैल गाय से ही मिलते थे, दूध, दही, घी की आपूर्ति तो होती ही थी, गौ मूत्र और गोबर तक उपयोगी माने जाते हैं। कुल मिलाकर मनुष्य के जीवन स्तर को समृद्ध बनाने में गाय अहम भूमिका निभाती थी, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं अब गाय का आर्थिक महत्व कम होने लगा है और धार्मिक महत्ता अभी बची हुई है।

 

वैज्ञानिक महत्व

 

ऐसा नहीं है कि गाय केवल धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण होती है। बल्कि कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं जो गाय के महत्व को दर्शाते हैं। भले ही दूध, दही, घी के मामले में आज भैंस से मात्रात्मक दृष्टि से उत्पादन ज्यादा मिलता हो लेकिन गुणवत्ता के मामले में गाय के दूध, व गाय के दूध से बने उत्पादों का कोई मुकाबला नहीं हैं। एक और गाय का दूध ज्यादा शक्तिशाली होता है तो वहीं उसमें वसा की मात्रा भैंस के दूध के मुकाबले बहुत कम मात्रा में पायी जाती है। गाय के दूध से बने अन्य उत्पाद भी काफी पौष्टिक होते हैं।

माना जाता है कि गाय ऑक्सीजन ग्रहण करती है और ऑक्सीजन ही छोड़ती है। गौमूत्र में ऐसे तत्व होते हैं जो हृद्य रोगों के लिये लाभकारी हैं। जैसे कि गौमूत्र में पोटेशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड और दूध देते समय हुए गौमूत्र में लेक्टोज आदि की मात्रा का आधिक्य होता है। जिसे चिकित्सीय दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।

गाय का गोबर खाद के रुप में इस्तेमाल करने पर जमीन की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होती है। इस तरह कई कारण हैं जो गाय के वैज्ञानिक महत्व को भी बतलाते हैं।

 

क्या सभी गाय पूजने योग्य हैं

 

चूंकि हिंदू धर्म के मानने वाले मुख्यत: भारत में हैं भारत में गाय की 28 नस्लें पाई जाती हैं। रेड सिंधी, साहिवाल, गिर, देवनी, थारपारकर आदि तो दुधारु गायों की नस्लें हैं। गाय दूसरे देशों में भी मिलती हैं जिनकी दूध के उत्पादन की क्षमता भी भारतीय गायों से ज्यादा होती है। आजकल विदेशी नस्ल की गायों को पालने का चलन भी उनकी उत्पादकता के चलते भारत में भी बढ़ रहा है लेकिन धार्मिक रुप से देशी गाय को ही पूजनीय माना जाता है। गुणवत्ता के मामले में भी देशी गाय का दूध ही बेहतर बताया जाता है।

 

गौ माता की महत्ता  कहते हैं कि जो गौमाता के खुर से उड़ी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है, वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है । पशुओं में बकरी, भेड़, ऊंटनी, भैंस का दूध भी काफी महत्व रखता है। किंतु केवल दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण भैंस प्रजाति को ही प्रोत्साहन मिला है, क्योंकि यह दूध अधिक देती है व वसा की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे घी अधिक मात्रा में प्राप्त होता है। 
गाय का दूध गुणात्मक दृष्टि से अच्छा होने के बावजूद कम मात्रा में प्राप्त होता है। दूध अधिक मिले इसके लिए कुछ लोग गाय और भैंस का दूध क्रूर और अमानवीय तरीके से निकालते हैं। गाय का दूध निकालने से पहले यदि बछड़ा/बछिया हो तो पहले उसे पिलाया जाना चाहिए। वर्तमान में लोग बछड़े/बछिया का हक कम करते है। साथ ही इंजेक्शन देकर दूध बढ़ाने का प्रयत्न करते हैं, जो की उचित नहीं है। 
 
प्राचीन ग्रंथों में सुरभि (इंद्र के पास), कामधेनु (समुद्र मंथन के 14 रत्नों में एक), पदमा, कपिला आदि गायों  महत्व बताया है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देवजी ने असि, मसि व कृषि गौ वंश को साथ लेकर मनुष्य को सिखाए। हमारा पूरा जीवन गाय पर आधारित है। शिव मंदिर में काली गाय के दर्शन मात्र से काल सर्प योग निवारण हो जाता है।
 
गाय के पीछे के पैरों के खुरों के दर्शन करने मात्र से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। गाय की प्रदक्षिणा करने से चारों धाम के दर्शन लाभ प्राप्त होता है, क्योंकि गाय के पैरों चार धाम है। जिस प्रकार पीपल का वृक्ष एवं तुलसी का पौधा आक्सीजन छोड़ते है। एक छोटा चम्मच देसी गाय का घी जलते हुए कंडे पर डाला जाए तो एक टन ऑक्सीजन बनती है। इसलिए हमारे यहां यज्ञ हवन अग्नि -होम में गाय का ही घी उपयोग में लिया जाता है। प्रदूषण को दूर करने का इससे अच्छा और कोई साधन नहीं है। 
 
धार्मिक ग्रंथों में लिखा है "गावो विश्वस्य मातर:" अर्थात गाय विश्व की माता है। गौ माता की रीढ़ की हड्डी में सूर्य नाड़ी एवं केतुनाड़ी साथ हुआ करती है, गौमाता जब धुप में निकलती है तो सूर्य का प्रकाश गौमाता की रीढ़ हड्डी पर पड़ने से घर्षण द्धारा केरोटिन नाम का पदार्थ बनता है जिसे स्वर्णक्षार कहते हैं। यह पदार्थ नीचे आकर दूध में मिलकर उसे हल्का पीला बनाता है। इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला नजर आता है। इसे पीने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है। जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों और सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो की वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो हमें समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा। 
 
गौ माता का जंगल से घर वापस लौटने का संध्या का समय (गोधूलि वेला) अत्यंत शुभ एवं पवित्र है। गाय का मूत्र गो औषधि है। मां शब्द की उत्पत्ति गौ मुख से हुई है। मानव समाज में भी मां शब्द कहना गाय से सीखा है। जब गौ वत्स रंभाता है तो मां शब्द गुंजायमान होता है। गौ-शाला में बैठकर किए गए यज्ञ हवन ,जप-तप का फल कई गुना मिलता है। बच्चों को नजर लग जाने पर, गौ माता की पूंछ से बच्चों को झाड़े जाने से नजर उत्तर जाती है, इसका उदाहरण ग्रंथों में भी पढ़ने को मिलता है,  जब पूतना उद्धार में भगवान कृष्ण को नजर लग जाने पर गाय की पूंछ से नजर उतारी गई। 

गौ के गोबर से लीपने पर स्थान पवित्र होता है। गौ-मूत्र का पवन ग्रंथों में अथर्ववेद, चरकसहिंता, राजतिपटु, बाण भट्ट, अमृत सागर, भाव सागर, सश्रुतु संहिता में सुंदर वर्णन किया गया है। काली गाय का दूध त्रिदोष नाशक सर्वोत्तम है। रुसी वैज्ञानिक शिरोविच ने कहा था कि गाय का दूध में रेडियो विकिरण से रक्षा करने की सर्वाधिक शक्ति होती है। गाय का दूध एक ऐसा भोजन है, जिसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेड, दुग्ध, शर्करा, खनिज लवण वसा आदि मनुष्य शरीर के पोषक तत्व भरपूर पाए जाते है। गाय का दूध रसायन का करता है। 
 
आज भी कई घरों में गाय की रोटी राखी जाती है। कई स्थानों पर संस्थाएं गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रही है, जो कि प्रशंसनीय कार्य है। साथ ही यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने का आंदोलन, मांस निर्यात नीति का पुरजोर विरोध एवं गौ रक्षा पालन संवर्धन हेतु सामाजिक धार्मिक संस्थाएं एवं सेवा भावी लोग लगातार संघर्षरत है। 
 
दुःख इस बात का भी होता है कि लोग गाय को आवारा भटकने के लिए बाजारों में छोड़ देते है। उन्हें इनके भूख प्यास की कोई चिंता ही नहीं होती। लोगों को चाहिए की यदि गाय पालने का शौक है तो उनकी देखभाल भी आवश्यक है, क्योंकि गाय हमारी माता है एवं गौ रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। 


गौ माता - क्यों हिंदू मानते हैं गाय को माता
गाय हिंदू समुदाय में माता का दर्जा दिया जाता है, उसकी पूजा की जाती है। ग्रामीण इलाकों में तो आज भी हर रोज खाना बनाते समय पहली रोटी गाय के नाम की बनती है। प्राचीन समय से ही अन्य पालतु पशुओं की तुलना में गाय को अधिक महत्व दिया जाता है। हालांकि वर्तमान में परिदृश्य बदला है और गौ धन को पालने का चलन कम हो गया है, लेकिन गाय के धार्मिक महत्व में किसी तरह की कोई कमी नहीं आयी है बल्कि पिछले कुछ समय से तो गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने तक मांग उठने लगी है। गौहत्या को धार्मिक दृष्टि से ब्रह्म हत्या के समान माना जाता है हाल ही में हरियाणा में तो गौहत्या पर सख्त कानून भी बनाया गया है। आइये जानते हैं गाय को क्यों माता का दर्जा देते हैं हिंदू लोग और क्यों माना जाता है इसे श्रेष्ठ?


गाय का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

गाय को माता मानने के पिछे यह आस्था है कि गाय में समस्त देवता निवास करते हैं व प्रकृति की कृपा भी गाय की सेवा करने से ही मिलती है। भगवान शिव का वाहन नंदी (बैल), भगवान इंद्र के पास समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली गाय कामधेनू, भगवान श्री कृष्ण का गोपाल होना एवं अन्य देवियों के मातृवत गुणों को गाय में देखना भी गाय को पूज्य बनाते हैं।
भविष्य पुराण के अनुसार गोमाता के पृष्ठदेश यानि पीठ में ब्रह्मा निवास करते हैं तो गले में भगवान विष्णु विराजते हैं। भगवान शिव मुख में रहते हैं तो मध्य भाग में सभी देवताओं का वास है। गऊ माता का रोम रोम महर्षियों का ठिकाना है तो पूंछ का स्थान अनंत नाग का है, खूरों में सारे पर्वत समाये हैं तो गौमूत्र में गंगादि पवित्र नदिया, गौमय जहां लक्ष्मी का निवास तो माता के नेत्रों में सूर्य और चंद्र का वास है। कुल मिलाकर गाय को पृथ्वी, ब्राह्मण और देव का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन समय में गोदान सबसे बड़ा दान माना जाता था और गौ हत्या को महापाप। यही कारण रहे हैं कि वैदिक काल से ही हिंदू धर्म के मानने वाले गाय की पूजा करते आ रहे हैं। गाय की पूजा के लिये गोपाष्टमी का त्यौहार भी भारत भर में मनाया जाता है।
साल 2016 में गोपाष्टमी कब है जानने के लिये यहां क्लिक करें

गाय का आर्थिक महत्व

प्राचीन काल में तो व्यक्ति की समृद्धि, संपन्नता गोधन से ही आंकी जाती थी यानि जिसके पास जितनी ज्यादा गाय वह उतना ही धनवान, तमाम कर्मकांडो, संस्कारों में गो दान को ही अहमियत दी जाती थी, परिवार का भरण पोषण गाय पर ही निर्भर करता था, खेतों को जोतने के लिये बैल गाय से ही मिलते थे, दूध, दही, घी की आपूर्ति तो होती ही थी, गौ मूत्र और गोबर तक उपयोगी माने जाते हैं। कुल मिलाकर मनुष्य के जीवन स्तर को समृद्ध बनाने में गाय अहम भूमिका निभाती थी, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं अब गाय का आर्थिक महत्व कम होने लगा है और धार्मिक महत्ता अभी बची हुई है।

वैज्ञानिक महत्व

ऐसा नहीं है कि गाय केवल धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण होती है। बल्कि कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं जो गाय के महत्व को दर्शाते हैं। भले ही दूध, दही, घी के मामले में आज भैंस से मात्रात्मक दृष्टि से उत्पादन ज्यादा मिलता हो लेकिन गुणवत्ता के मामले में गाय के दूध, व गाय के दूध से बने उत्पादों का कोई मुकाबला नहीं हैं। एक और गाय का दूध ज्यादा शक्तिशाली होता है तो वहीं उसमें वसा की मात्रा भैंस के दूध के मुकाबले बहुत कम मात्रा में पायी जाती है। गाय के दूध से बने अन्य उत्पाद भी काफी पौष्टिक होते हैं।
माना जाता है कि गाय ऑक्सीजन ग्रहण करती है और ऑक्सीजन ही छोड़ती है। गौमूत्र में ऐसे तत्व होते हैं जो हृद्य रोगों के लिये लाभकारी हैं। जैसे कि गौमूत्र में पोटेशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड और दूध देते समय हुए गौमूत्र में लेक्टोज आदि की मात्रा का आधिक्य होता है। जिसे चिकित्सीय दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।
गाय का गोबर खाद के रुप में इस्तेमाल करने पर जमीन की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होती है। इस तरह कई कारण हैं जो गाय के वैज्ञानिक महत्व को भी बतलाते हैं।

क्या सभी गाय पूजने योग्य हैं

चूंकि हिंदू धर्म के मानने वाले मुख्यत: भारत में हैं भारत में गाय की 28 नस्लें पाई जाती हैं। रेड सिंधी, साहिवाल, गिर, देवनी, थारपारकर आदि तो दुधारु गायों की नस्लें हैं। गाय दूसरे देशों में भी मिलती हैं जिनकी दूध के उत्पादन की क्षमता भी भारतीय गायों से ज्यादा होती है। आजकल विदेशी नस्ल की गायों को पालने का चलन भी उनकी उत्पादकता के चलते भारत में भी बढ़ रहा है लेकिन धार्मिक रुप से देशी गाय को ही पूजनीय माना जाता है। गुणवत्ता के मामले में भी देशी गाय का दूध ही बेहतर बताया जाता है।




 

 

 

 

 

 

श्री राम मंदिर जीर्णोद्धार वर्ष

राम जी, सिद्ध राम जी, राम ही राह बनाई,राम ही राह बनाई,
राम ही कर्म  है राम ही कर्त्ता,  राम की सकाल बड़ाई, राम की सकाल बड़ाई  राम काज करने वालों में राम की शक्ति समाई,
पृथक पृथक नामो से सारे काम कर रघुराई,
भक्त परायण निज भक्तों को सरा श्रेय दिलाते हैं |
जिन पर कृपा राम करे वह पत्थर भी तर जाते हैं"
अद्भुत, अविस्मरणीय, अलौकिक क्षण !!

प्रभु की कृपा भयो सब काजू !  जन्म हमार सुफल भा आजू  !! 
"


श्री रामचंद्र जी" की असीम अनुकम्पा से "श्री राम प्राण प्रतिष्ठा" के उपलक्षय में " प्रयागराज के नैनी में स्थित भुवनेश्वर महादेव मंदिर में श्री राम की कृपा से भव्य भंडारे का आयोजन ट्रस्ट के सभी सदस्यों द्वारा किया गया"  जहां ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री धनंजय मिश्रा जी भंडारे के संयोजक श्री वीरेंद्र जी सहयोग करता सःकोषाध्यक्ष रवि जायसवाल, कोषाध्यक्ष शिव कुमार तथा अन्य लोगों द्वारा संपन्न कराया गया| अध्यक्ष एवं अन्य लोग "विशाल भंडारे" एवं "दीपोत्सव" कार्यक्रम में उपस्थित रहे ।।
"प्रभु सिया राम" की असीम अनुकम्पा हम समस्त प्राणियों पर बनी रहे, हम सब के कार्य सुफलित हो एवं सभी प्राणियों के जीवन में सुख -शांति बनी रहे !!

- अति प्राचीन वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज) श्री वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध मंदिर है।  इलाहाबाद का वेणी माधव मंदिर श्री कृष्ण जी को समर्पित है। श्री कृष्ण जी को इलाहाबाद शहर का नग

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीणोद्धार समिति (ट्रस्ट )
राष्ट्रीय अध्यक्ष- श्री धनंजय मिश्रा और जगदीश भारतीया
मंदिर - अति प्राचीन वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज)

श्री वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद का एक प्रसिद्ध मंदिर है।  इलाहाबाद का वेणी माधव मंदिर श्री कृष्ण जी को समर्पित है। श्री कृष्ण जी को इलाहाबाद शहर का नगर देवता कहा जाता है। वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद में दारागंज में स्थित है। यह मंदिर दारागंज की तंग गली में स्थित है। मंदिर में लोगों की भीड़ हमेशा लगी रहती है और मंदिर में भजन-कीर्तन हमेशा चलते रहते हैं। 
श्री वेणी माधव मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रयाग में प्रथम यज्ञ किया था। पुराणों के अनुसार प्रयाग में सभी तीर्थों का उद्गम है। इस पावन नगरी की निर्माता भगवान श्री विष्णु स्वयं है और वह यहां भगवान श्री वेणी माधव के रूप में विराजमान है। भगवान के प्रयाग में 12 स्वरूप विद्यमान है, जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। जिनमें से भगवान श्री वेणी माधव प्रयाग के प्रधान देवता माने गए हैं, क्योंकि इनका निवास गंगा यमुना और सरस्वती नदियों के संगम से बने त्रिवेणी क्षेत्र के मध्य में स्थित है। संगम स्नान के बाद भगवान श्री वेणी माधव जी के दर्शन करने से ही पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता पुराणों एवं रामचरितमानस में वर्णित है। इस प्राचीनतम मंदिर के प्रांगण में चैतन्य महाप्रभु जी वेणी माधव जी के दर्शन करने हेतु संकीर्तन एवं नृत्य किया करते थे। 
वेणी माधव मंदिर के आसपास आपको प्रसाद की बहुत सारी दुकानें देखने के लिए मिल जाती है। वेणी माधव जी को लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है। वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद के संगम क्षेत्र से करीब 1 किलोमीटर दूर होगा। हम लोग इस मंदिर में पैदल ही गए थे। 
वेणी माधव मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार आपको दारागंज की मुख्य सड़क में पुलिस थाने के पास में ही देखने के लिए मिल जाता है। दारागंज का इस एरिया में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है और हम लोग दारागंज के प्रवेश द्वार से वेणी माधव मंदिर तक पैदल गए। वेणी माधव मंदिर मेन रोड पर ही बना हुआ है और मंदिर के आजू-बाजू बहुत सारी प्रसाद ओं की दुकान और लड्डू की दुकान देखने के लिए मिलती है। मंदिर के बाहर आपको श्री कृष्ण के खूबसूरत वस्त्र भी खरीदने के लिए मिलते हैं। अगर आप चाहे तो यहां से श्री कृष्ण के वस्त्र भी ले सकते हैं।  हम लोग मंदिर में पहुंचकर श्री कृष्ण भगवान जी के और राधा रानी जी के दर्शन किए। श्री कृष्ण भगवान जी की मूर्ति यहां पर श्याम रंग की है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है और उन्हें खूबसूरत कपड़ों से सजाया गया था, तो वह ज्यादा अच्छी लग रही थी। यहां पर जब हम लोग गए थे। तब भजन-कीर्तन भी हो रहे थे। यहां पर हमने दर्शन करके एक परिक्रमा करें। हमें यहां पर शंकर भगवान जी का मंदिर भी देखने के लिए मिला और यहां पर आपको एक बाबा की समाधि की मूर्ति भी देखने के लिए मिलती है। यह मूर्ति हठ योगी महर्षि ओमकार देवगिरी की है।बेनी माधव मंदिर के ठीक सामने सोमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह मंदिर शंकर भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर भी बहुत खूबसूरत है और प्राचीन है। आप इस मंदिर में शंकर भगवान जी के दर्शन कर सकते हैं। यह दोनों मंदिर आमने-सामने हैं। इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है।       
 मंदिर - अति प्राचीन वेणी माधव मंदिर इलाहाबाद (प्रयागराज)

राष्ट्रीय हिंदू मन्दिर जीर्णोद्धार समिति के सदस्यों द्वारा अति प्राचीन अयोध्या नगरी में भ्रमण किया गया जहां भगवान राम के अति प्राचीन महलो मंदिरों को देखा गया निर्माण तथा कलाकृति की जानकारी प्राप्त क

 अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिरजीर्णोद्धार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री धनंजय मिश्रा  सचिव श्री अभिनव शुक्ला आलोक मिश्रा द्वारा अयोध्या में विभिन्न मंदिरों का भ्रमण किया गया उनकी प्राचीनता  कलाकृति के बारे में जानकारी प्राप्त की गई

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीणोद्धार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री धनंजय मिश्रा एवं उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष देव प्रकाश मिश्रा एवं सत्य प्रकाश मिश्रा भैया जी के दाल भात कार्यक्रम मौजूद रहे

 अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीणोद्धार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री धनंजय मिश्रा उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष देव प्रकाश मिश्रा एवं सत्य प्रकाश मिश्रा द्वारा चर्चा के दौरान क्या बताया गया कि प्रयागराज एक ऐसी संस्था है  जो  कुछ दिनों से भैया जी के दाल भात कार्यक्रम के नाम से समाज के उन असहाय एवं गरीब दीन दुखियों सेवा एवं भोजन का प्रबंध करता आ रहा है तथा संस्था का उद्देश्य है कि भारत का कोई भी परिवार या व्यक्ति अभी भी भूख से ना मारे ऐसे अद्भुत कार्य करने वाले  व्यक्तियों से मिलने की आकांक्षा को लेकर  मैं स्वयं कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ  और मैं भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बना जिससे मुझे ऐसे प्रयाग वासियों पर  गर्भ की अनुभूति हुई

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार समिति द्वारा हनुमान मंदिर पर भूखे को भोजन कराया गया

 अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीणोद्धार समिति द्वारा बड़े हनुमान जी गंगा घाट पर संस्था के संरक्षक एवं अध्यक्ष द्वारा गरीब दीन दुखियों साधु संतों राहगीरों को अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार समिति  द्वारा लगभग1100 लोगों का भंडारे का आयोजन कराया गया जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष धनंजय मिश्रा स्वयं भोजन का वितरण किया गया और हनुमान जी क़ा दर्शन किया गया

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री धनंजय मिश्रा एवं उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष देव प्रकाश मिश्रा एवं सत्य प्रकाश मिश्र ब्राह्मण महाकुंभ प्रयागराज में मौजूद रहे

  आज दिनांक 26 11 2023 दिन रविवार के दिन भगवान परशुराम वाहिनी की तरफ से प्रयागराज के पावन धरती पर ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया गया इस भव्य कार्यक्रम में  देश एवं प्रदेश के ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ  लोग मौजूद रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा जी वर्तमान सांसद श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी जी अन्य गण मन लोग मौजूद रहे अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार  आधार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष से धनंजय मिश्रा उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष सत्य प्रकाश एवं देव प्रकाश मिश्रा अन्य साथी गण मौजूद रहे महाकुंभ के दौरान ब्राह्मण समाज अस्तित्व विकास और समाज में ब्राह्मणों का योगदान संबंधित चर्चाएं हुई मंच पर उपस्थित सम्मानित  साधु संतों ने ब्राह्मण समाज के लोगों का मार्गदर्शन किया आशीर्वाद प्रदान किया

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार समिति द्वारा भगवान शिव का लिंग स्वरूप में अलौकिक दर्शन और भगवान के स्वरूप को जानना का प्रयास करना

 मैं धनंजय मिश्रा मुख्य संरक्षक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीणोद्धार समिति का हूं मैंने अपने जीवन काल के इस उतार-चढ़ाव भरे इस जीवन में अनेक कस्टम को सहते हुए अपने आप को जानने का प्रयास किया तब मुझे यह पता चला कि सांसारिक जीवन में अपना कोई नहीं है जब ह्रदय ने ईश्वर का ध्यान किया तो पता चला कि इस भौतिक संसार दुखों का अंत कभी भी नहीं हो सकता इस संसार में जन्म लेने वाला हर जिव को कष्ट भोगना ही पड़ता है चाहे मानव हो या देवता ईश्वर द्वारा सृष्टि का संचालन के लिए नियम बनाए गए हैं उसी नियम के तहत संसार में अनेकों चीज अपने-अपने स्थान पर मर्यादा में हैं जैसे सूर्य अपनी तप के साथ मर्यादा में है नदी अपनी बावाह  के साथ मर्यादा में है वृक्ष अपने फल अथवा धर्म के साथ मर्यादा में है समुद्र अपने विशालता के साथ मर्यादा में चंद्रमा अपनी शीतलता के साथ मर्यादा में है सभी ग्रह और सौर्य मंडल अपनी तेज के साथ मर्यादा में है और इस भौतिक संसार में हर जीव की उत्पत्ति और अंत का कारण ईश्वर की इच्छा से होता है वह अपने लीलाओं द्वारा अनेक रूप से इस सृष्टि में विद्यमान है कभी वेदों के रूप में तो कभी ऋषि मुनियों के रूप में तो कभी गुरुओं के रूप में तो कभी उपनिषदों के रूप में तो कभी भगवान के जन्मों के स्वरूप में लीलाओं को करते हुए इस सृष्टि को संचालित कर रहा है और समय-समय पर मानव मात्र को अपना दर्शन करते हुए परमधाम की गति के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराते रहता है अपने स्वरूप में दर्शन भी देता है वह कहते है कि इस सांसारिक जीवन में दुखों का अंत करना है तो मेरी भक्ति करो मेरे शरण में आओ! सृष्टि में सब कुछ, कुछ भी तुम्हारा नहीं है लालसा के साथ अनेक चीजों का प्रयत्न कर रहे हो वह मेरी इच्छा पर ही आधारित है मेरे बिना कुछ भी संभव नहीं है सारी सृष्टि जमीन जायदाद हवा पानी जीव जंतु मेरे द्वारा ही बनाए हुए हैं मैंने तुम्हें अनेक जन्मों के जन्म और मृत्यु के चक्कर से मुक्त होने के लिए मानव जीवन दिया है तुम कर्म करोगे के आधार पर ईश्वर तुम्हें जीवन चक्र से मुक्ति देगा ईश्वर अनेकों बार स्वयं मानव रूपी शरीर को धारण कर और अपने कर्मों द्वारा मुक्ति का मार्ग का दर्शन कराया है ईश्वर ने मानव रूप में यह बताया है परिवार क्या है  रिश्ते नाते क्या होते हैं  किसी प्रकार से मर्यादा में रहना चाहिए परिवार की क्या मर्यादा है गुरु की क्या मर्यादा है महादेव की कृपा संत के रूप में भगवान का दर्शन हुआ गुरु के रूप में जो ज्ञान दिया गया उससे मैंने स्वयं भगवान शिव का दर्शन किया जिसका स्वरूप आज मेरे हृदय में विद्यमान है भगवान शिव की इच्छा से और गुरुओं के आदेश पर मैं धनंजय मिश्रा अपनी पत्नी एवं अपने पुत्र के साथ भगवान शिव के शरण में चला गया भगवान शिव के आदेश पर भव्य मंदिर का निर्माण लिए प्रयासरत हूं भगवान शिव के मंदिर का निर्माण कार्य का प्रारंभ हो चुका है और भगवान शिव की इच्छा से मेरे द्वारा प्रयागराज से 1250 किलोमीटर दूर ओंकारेश्वर की पहाड़ियों में स्थित नर्मदा के गर्व से भगवान का साक्षात जनेऊ धारी रूप में शिवलिंग स्वरूप भगवान शिव के पांच भक्तों द्वारा पूरे आदर और सम्मान के साथ वैदिक मंत्र एवं उच्चारण के साथ अभिषेक करते हुए भगवान के स्वरूप ओंकारेश्वर मामेश्वर का दर्शन करते हुए प्रयागराज लाया गया मां गंगा अमृत मान जल से अभिषेक कराकर मंदिर परिसर में रखा गया है और भगवान के गर्भ ग्रह का निर्माण करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है पांच लोगों ने जो कार्य किया हैउनके नाम है मैं स्वयं धनंजय मिश्रा,आचार्य अभिनव शुक्ला,शिव कुमार,मानवेंद्र मिश्रा,आकाश मिश्रा सभी शिव भक्तों के सहयोग से भगवान शिव का कार्य अपने सिद्ध स्वरूप में हो रहा है सभी मित्रों पर भगवान शिव की कृपा बनी रहे और ऐसे ही सनातन का कार्य करते रहें

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीणोद्धार समिति द्वारा मां गंगा संरक्षण के लिए प्रयास


 सेवा में,
  प्रधानमंत्री जी
  भारत सरकार
                  विषय - अमृत तुल्य मां गंगा में बहने वाले शहर के नालों, गंदगी,अथवा कचरो से के संबंध में प्रार्थना पत्र-
श्रीमान,
     सविनय निवेदन है कि  मैं धनंजय मिश्रा s/o श्री दद्दन मिश्रा निवासी 517 /सी/2A चक दौदी नैनी रोडस्टेशन रोड प्रयागराज उत्तर प्रदेश का हु l श्रीमान अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार समिति में मुख्य संरक्षक अथवा अध्यक्ष के पद पर हूं श्रीमान जी मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि अमृत तुल्य मां गंगा में शहर के विभिन्न जगहों से निकलने वाले नाले बिना फिल्टर किए हुए डायरेक्ट मां गंगा तथा यमुना नदी गिर रहे हैं श्रीमान जी मैं आपको सुचित करना चाहता हूं कि गंगा में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग स्नान करते हैं पूजन करते हैं और देश के विभिन्न विभिन्न जगहों से यात्री मां गंगा का दर्शन तथा स्नान करने के लिए प्रयागराज आते हैं शहर के छोटे बड़े गंदे नालाओं के जल का मां गंगा में गिरने के कारण मां गंगा अपमानित एवं दूषित हो रही है श्रीमान आपको सूचित करना चाहता हूं कि प्रयागराज निगम प्राधिकरण द्वारा गंदे नालों के जल से संबंधित किया जाने वाला कोई भी कार्य किसी भी प्रकार का होता हुआ धरातल पर नहीं दिख रहा l और ना ही केंद्र सरकार द्वारा चल रहे गंगा सफाई योजना के तहत कोई भी कार्य धरातल पर नहीं दिख रहा है जिसके कारण मोक्षदायनी मां गंगा का अस्तित्व  प्रयागराज के पावन धरती पर विलुप्त की तरफ बढ़ता हुआ दिख रहा है श्रीमान मैं आप को सूचित करना चाहता हूं कि गंगा नदी का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। 2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, “अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है”।
इस सोच को कार्यान्वित करने के लिए सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए l  वर्ष  2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया श्रीमान विभिन्न मंत्रालयों के बीच एवं केंद्र-राज्य के बीच समन्वय को बेहतर करने एवं कार्य योजना की तैयारी में सभी की भागीदारी बढ़ाने के साथ केंद्र एवं राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र को बेहतर करने के प्रयास किये गए हैं।
कार्यक्रम के कार्यान्वयन को शुरूआती स्तर की गतिविधियों (तत्काल प्रभाव दिखने के लिए), मध्यम अवधि की गतिविधियों (समय सीमा के 5 साल के भीतर लागू किया जाना है), और लंबी अवधि की गतिविधियों (10 साल के भीतर लागू किया जाना है) में बांटा गया है।
शुरूआती स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत नदी की उपरी सतह की सफ़ाई से लेकर बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने; ग्रामीण क्षेत्रों की सफ़ाई से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की नालियों से आते मैले पदार्थ (ठोस एवं तरल) और शौचालयों के निर्माण; शवदाह गृह का नवीकरण, आधुनिकीकरण और निर्माण ताकि अधजले या आंशिक रूप से जले हुए शव को नदी में बहाने से रोका जा सके, लोगों और नदियों के बीच संबंध को बेहतर करने के लिए घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित है। लेकिन इस प्रकार का कोई भी कार्य प्रयागराज की धरती पर तथा घाटों पर नहीं दिख रहा है संबंधित विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का कार्य धरातल पर  नहीं दिख रहा है
श्रीमान जी प्रयागराज कि पावन धरती पर हर वर्ष कुंभ के आयोजन के दौरान केवल मात्र कार्य होता है और जैसे ही कुंभ खत्म हो जाता है उनके साथ ही साथ सारे सफाई से संबंधित कार्य धरातल पर दिखने बंद हो जाते हैं श्रीमान जी हम सबको ज्ञात है इस बात का मां गंगा का स्वरूप 1990 के दशक में प्रयागराज कि इस धारा पर बहुत ही विशाल हुआ करता था और मां गंगा का जल अत्यंत साफ था जबकि मां गंगा की सफाई संबंधित कई बहुतायत परियोजना भी सरकार द्वारा नहीं चलाई जा रही थी सरकार द्वारा बिजली उत्पादन के लिए बनाए गए बांधों के कारण मां गंगा का अस्तित्व विलुप्त होने तरफ बढ़ता हुआ दिख रहा है और ऐसा ही चलता  रहा तो हमारे ऋषि मुनियों द्वारा अत्यंत परिश्रम, उपासना कर के लाई हुई मां गंगा का अस्तित्व इस धरातल पर से हमेशा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा मैं आप से आग्रह करना चाहता हूं कि मां गंगा की सफाई से संबंधित विभागों का समय-समय पर निरीक्षण कर कार्यक्षेत्र और अपने क्षेत्राधिकार में किए गए कार्यों को धरातल पर हो रहा है कि नहीं हो रहा है की जांच करते रहना चाहिए श्रीमान जी मैं आप से आग्रह करना चाहता हूं कि कुंभ के प्रारंभ में एक माह पूर्व  बांधो द्वारा जल को छोड़ जाना चाहिए जिससे प्रयागराज में जलस्तर बना रहे l  और अमृत  तुतुल्य मां गंगा का अस्तित्व बचा रहे देश विदेश से आने वाले लोग स्नान कर सकें और हर वर्ष लगने वाला कुंभ की परंपरा जो हजारों वर्ष से निरंतर चली आ रही है वह आगे भी चलता  रहेl श्रीमान आपसे विनम्र निवेदन है कि सूचना को संबंधित  विभाग को अवगत कराते हुए गंगा सफाई के संबंध में चल रही योजनाओं का पुन्नर  अवलोकन करना  प्रयागराज की जनता एवं समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है
               
  आपकी अपार कृपा होगी धन्यवाद!




दिनांक:-03/12/2023                                                     .                         अध्यक्ष/ संरक्षक
                                                                                                               अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर
                                                                                                                जीणोद्धार समिति                                                                                                                         प्रयागराज