भारत सरकार रजिस्ट्रेशन सं0 - UP / 2023/0361734 राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय - नीति आयोग
उत्तरप्रदेश सरकार रजिस्ट्रेशन स0-UP-14350304/438/2023
ट्रस्ट निर्माण की परिकल्पना
भारतीय जनमानस के आर्थिक सामाजिक एवं शैक्षिक तथा सनातन धर्म हिंदू संस्कृत परंपराओं के साथ-साथ धर्म का प्रचार करना वैदिक धर्म ग्रंथो का जनमानस में शिक्षा प्रदान करते हुए हिंदू धार्मिक स्थलों मंदिरों कलाओं संस्कृति परंपराओं और विविधताओं के उत्थान एवं कल्याणकारी आयामों को सुचारू रूप से तथा विधि के अनुसार संचालित करने हेतु एक ट्रस्ट का होना आवश्यक है ट्रस्ट के माध्यम से देश एवं विदेश मे भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म उनके पुनरुत्थान एवं प्रचार के लिए प्रयास करना सनातन धर्म एवं वेदों एवं पुराणों की विविधताओं को समाज एवं आने वाली पीडियो तक पहुंचाना एवं पूर्वजों गुरुओ ऋषियों एवं मुनियों द्वारा समाज के प्रति किए गए कल्याणकारियों को अवगत कराना देश के युवाओं एवं महिलाओं विदेश में रहने वाले भारतीयों को सनातन धर्म संस्कृति के प्रति जागरूक करना तथा विभिन्न आयामों एवं अवसरों के माध्यम से मानव सेवक करना समाज में स्थित गौ माता एवं जीव जंतुओं की सेवा के साथ-साथ रक्षा करना आदि लक्ष्य की प्राप्ति करने का प्रयास ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा
(इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1882 के अंतर्गत कार्यरत)
ट्रस्ट का नाम- अंतर्राष्ट्रीय हिंदू मंदिर जीर्णोद्धार समिति(ट्रस्ट )
ट्रस्ट का पंजीकृत मुख्य कार्यालय- 49A गंगागंज, परगना एवं तहसील सदर जनपद प्रयागराज उत्तर प्रदेश
पिन कोड 211003
ट्रस्ट का कार्यक्षेत्र- संपूर्ण भारतवर्ष एवं अन्य देशों में
ट्रस्ट का वर्ग- चैरिटेबल
ट्रस्ट का कोष-51000/
ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य-
1. हिंदू मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों का जीणोद्धार करना एवं संरक्षित करना
2. हिंदू मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर पूजा करने की व्यवस्था करना एवं पुजारी की नियुक्ति कर पूजा पाठ करवाना
3. हिंदू मंदिरों के आस पास रहने वाले साधु संतों को भोजन और मौसम के अनुसार वस्त्र एवं रहने की व्यवस्था करना
4. हिंदू मंदिरों में पूजा उपासना भजन कीर्तन करते हुए मूर्तियों की देखरेख करना
5. हिंदू साधू संतो को चार वेद 18 महापुराणों को उपलब्ध कराना एवं धर्म प्रचार प्रसार के लिए प्रेरित करना
6. हिंदू परिवारों के निम्न आय वाले व्यक्तियों की कन्याओं की शिक्षा दीक्षा विवाह करना एवं उनकी रक्षा करना
7. हिंदू मंदिरों में पूजा उपासना मूर्तियों की देखरेख करना
8. हिंदू सनातन धरोहर की रक्षा करना जीर्णोद्धार करना एवं राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए केंद्र सरकार का सहयोग करना
9. हिंदू सनातन संस्कृति से जुड़े हुए स्तूप कल सिक्का सभ्यता संस्कृति इत्यादि की संरक्षण करना
10. हिंदू सनातन संस्कृति से जुड़े गौ माता की सेवा करना भोजन की व्यवस्था करना गौशलियों की व्यवस्था करना चिकित्सा की व्यवस्था करना और सरकारी चिकित्सालय में रजिस्ट्रेशन कराकर सरकार को अवगत कराना
11. जनमानस का सामाजिक मानसिक नैतिक शारीरिक आध्यात्मिक शैक्षिक एवं बौद्धिक विकास करना तथा संपूर्ण देश में स्वालंबन की भावना उत्पन्न कर एवं मानव मात्र का विकास करना
12. हिंदू सनातन संस्कृति में पूर्वजों एवं ऋषि मुनियों द्वारा दिए गए उपदेशों एवं संस्कारों तथा संस्कृति के साथ-साथ उनके पराक्रम सेवाओं को अवगत कराना
13. हिंदू सनातन संस्कृति की वर्तमान समय को देखते हुए सोशल मीडिया प्रिंट मीडिया डिजिटल मीडिया प्रसारण मीडिया आदि के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करना समय-समय पर विज्ञापन प्रस्तुत करना
14. हिंदू सनातन एवं स्वदेशी स्वदेशी जीवन शैली परिधान और संस्कृति के लिए लोगों को जागरूक करना
15. हिंदू सनातन संस्कृति के विकास के लिए प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा तक कॉलेज मेडिकल, विधि तकनीकी व फार्मा शिक्षा संस्थाओं का स्थापना करना व संचालन करना
16. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिये आवास, शिक्षा संस्थाओं का संचालन करना एवं मुक्त निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना ।
17. केन्द्र व राज्य सरकारो की योजनाओं को ट्रस्ट द्वारा जन-जन तक पात्र लोगों के पास पहुंचाने का कार्य एवं पात्र को लाभ दिलाने का कार्य किया जायेगा ।
18. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी नाम से शहर को विकसित करने से संबंधित नियमों / प्राधिकरण / स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड और जो भी कानूनी मानक होगा उसका क्रियान्वयन पर्यावरण को क्षति पहुंचाये बिना सुनिश्चित कराना है ।
19. प्रमुख ट्रस्टी द्वारा स्थापित संस्थाओं समितियों द्वारा महिला एवं बाल अधिकारों के संरक्षण से संबंधित राज्य व केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये कानूनों को प्रचार प्रसार कर लोगों को जागृत किया जायेगा ।
20. साइबर क्राइम से संबंधित अपराधों से बचाव हेतु जागरूकता अभियान संचालित किया जायेगा व साइबर क्राइम पर बनाये गये कानूनों को लोगों तक पहुंचाया जायेगा ।
21. बुजुर्ग, बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर समाज के प्रत्येक नागरिक को हर प्रकार सहायता प्रदान कर उनके जीवन स्तर को आदर्श बनाना ।
22. गरीब, वंचितऔर बेसहारा को विधिक सहायता उपलब्ध कराना ।
23. बेरोजगार, जरूरतमंद के लिये रोजगार के अवसर प्रदान कराना । शैक्षिक किताबों पेपर साप्ताहिक दैनिक समाचार पत्र, मासिक पत्रिका आदि का प्रकाशन कराना, लाइब्रेरी रीडिंग रूम तथा हास्टल / छात्रावास आदि की स्थापना एवं संचालन करना ।
24. धर्मशाला, आश्रम, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, आध्यात्मिक साधना एवं योग केन्द्र की स्थापना करना ।
25. दान दाताओं, विदेशी संस्थाओं, गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा सरकारी सहायता, ऋण, व अन्य सहायता प्राप्त करना तथा सरकारी नोडल संस्था का बिजनेस प्रमोटर एवं मास्टर फ्रेंचाइजी बनकर उसे बढ़ाने का कार्य करना ।
26. समय समय पर विभिन्न समस्याओं पर जनमानस के विचारों को जानने के लिये प्रपत्र पर प्रारूप तैयार कर उस पर सर्वे कराना ।
27. गंगा सफाई हेतु प्रदेश सरकार, केन्द्र सरकार आदि सिफारिश करना, जल बचाव संबंधित कार्य करना तथा आम जनता में जल ही जीवन है ऐसा ही भाव जगाकर जल के सदुपयोग के प्रति जागरूक करना ।
28. प्रदूषण एवं पर्यावरण सुधार हेतु वृहद वृक्षारोपण करवाना ।
29. निरीह प्राणियों पशु और पक्षियों की चिकित्सा का प्रबंध करना एवं उनके लिये चिकित्सालयों की स्थापना व व्यवस्था करना ।
30. ऊसर एवं बंजर भूमि को अधिक उपजाऊ बनाने हेतु कार्य करना तथा कृषिकों को आधुनिक तकनीक द्वारा खेती करने की जानकारी / प्रशिक्षण / नये यंत्रो की जानकारी देना तथा भूमि सुधार एवं सगन्धीय पौधों की खेती करना, नैडम एवं वर्मी कंपोस्ट तथा जैविक कृषि हेतु किसानों को प्रशिक्षण देना ।
31. सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन करना, चर्चा, सेमिनार, आयोजित करना, जनजातीय लोक कला एवं विनिर्दिष्ट कला का विकास करना संगीत महाविद्यालयों की स्थापना / संगीत कला केन्द्र की स्थापना करना, वाद्य यंत्रो का रख रखाव, करना समारोहों का आयोजन करना तथा विभिन्न विधाओं में संगीत प्रतियोगितायें आयोजित करना ।
32. युवाओं के विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता सम्मेलन, चर्चा, सेमिनार तथा एकता की भावना पैदा करने हेतु खेलकूद को बढ़ावा देने हेतु खेल प्रतियोगिताओं तथा युवाओं में नेतृत्व गुण बढ़ाना ।
33. ट्रस्ट के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु जनपद, प्रदेश औऱ राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यकतानुसार सभी सदस्यों की सहमति से ट्रस्ट की शाखा व कार्यालयों की स्थापना करना ।
प्रमुख ट्रस्टी एवं अन्य ट्रस्टीयो के संरक्षक एवं प्रेरणा स्रोत-
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू मन्दिर जीर्णोद्धार समिति के प्रमुख प्रेरणास्त्रोत एवं संरक्षक महन्त श्री श्री 108 महाराज बाबा पगड़ीदास दिगम्बर राव महन्त वैष्णो अखाड़ा जिन्होने सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। श्री महाराज द्वारा आध्यात्म चिन्तन एवं भगवान राम कृष्ण तथा भगवान शिव शक्ति की आराधना कर सिद्धियाँ एवं ज्ञान की प्राप्ति की गयी एवं अपने तपों से एवं प्राप्त ज्ञान से समाज के कल्याण एवं सनातन धर्म की रक्षा में दान के स्वरूप में समाज को दिया गया । श्री श्री 108 महाराज द्वारा मन एवं विचारों में सनातन धर्म के प्रचार एवं प्रसार हिन्दुओं की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति को समाज के लोगों से अवगत कराने के उद्देश्य से अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू मन्दिर जीर्णोद्धार समिति का गठन एवं संचालन किया जाना आवश्यक हुआ और प्रेरण प्राप्त हुई ।
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू मन्दिर जीर्णोद्धार समिति को प्रेरित करने वाले ऋषि मुनियों, साधू सन्तों, किन्नर अखाड़ा एवं अखाड़ों जो कि प्राचीन काल से ही सनातन संस्कृति अथवा धर्म की रक्षा का कार्य पूर्ण निष्ठा एवं लगन से पीढ़ी दर पीढ़ी करते चले आ रहे हैं। जिनके कार्यो ने यह प्रेरित किया कि हम अपने जीवन में अपने पूर्वजों तथा साधू सन्तों द्वारा दिये गये मार्गों को अपनाते हुए अपने धर्मग्रन्थों के साथ जैसे 4 वेद, 18 पुराणों तथा धर्मग्रन्थों, गीता, रामायण, रामचरित मानस, शिव पुराण के साथ धर्म का प्रचार एवं प्रसार करने के लिए प्रेरित किया। पृथ्वी पर विद्यमान अन्य शक्तियाँ जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सृष्टि के आरम्भ से ही जैसे सूर्य, पृथ्वी जल, नभ, वायु जो मानव समाज एवं पशु पक्षियों एवं अन्य जीवों की रक्षा करते चले आ रहे हैं। ऐसी आध्यात्मिक शक्तियाँ जो पृथ्वी पर हम और आपके बीच में निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं एवं हमारे धरोहर स्वरूप माँ गंगा जिन्होने समाज के कल्याण के लिए पृथ्वी पर निरन्तर एवं अनन्त काल से प्रवाहित होती चली आ रही हैं तथा सनातन धर्म की धरोहर गौ माता जो निःस्वार्थ भाव से बिना भेदभाव किये अमृत तुल्य दूध एवं अन्य प्रकार से मानव समाज के लिए कल्याण कर रही हैं । हमारे वायु मण्डल में उपस्थित सभी वृक्ष एवं पेड-पौधे जो समाज के कल्याण के लिए फल देते चले आ रहे हैं जिन्होंने हमें अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू मन्दिर जीर्णोद्धार समिति का गठन कर अपना जीवन कुछ समय परमार्थ को देने के लिए प्रेरित किया |
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू मन्दिर जीर्णोद्धार समिति को प्रेरित करने वाले श्री बागेश्वर धाम के अद्भुत तेजस्वी बाबा श्री धीरेन्द्र शास्त्री जी महाराज जिन्होंने बहुत ही कम समय में ज्ञान एवं सिद्धियों की प्राप्ति की और समाज के कल्याण, सनातन धर्म की रक्षा को बचाये रखने के लिए निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं ऐसी महापुरूष के किये गये कार्यों ने मन और विचारों ने सनातन धर्म के लिए भावना जागृत की ।
"वृक्ष कबहुँ न फल भखै,
'नदी न संचय नीर'
'परमार्थ के कारने
साधुन धरा शरीर ।”
प्रमुख ट्रस्टी एवं अन्य ट्रस्टियों के अधिकार एवं कर्तव्य एवं नियुक्ति –
1. यह कि प्रमुख ट्रस्टी / संस्थापक ट्रस्टी ने ट्रस्ट को सुचारू रूप से संचालन करने हेतु अपने को प्रमुख ट्रस्टी एवं सात ट्रस्टी नामित कर लिया है । प्रमुख ट्रस्टी को ट्रस्ट का सुचारू रूप से संचालन करने के लिये नये ट्रस्टी / पदाधिकारी बनाने व उनको पद देने का अधिकार होगा । प्रमुख ट्रस्टी एवं ट्रस्टियों का कार्यकाल जीवन पर्यन्त होगा । अन्य पदाधिकारियों/सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा ।
2. यहकि प्रमुख ट्रस्टी को अपनी इच्छानुसार ट्रस्ट के सुचारू रूप से संचालन हेतु बोर्ड आफ ट्रस्टीज की सलाह से आवश्यकतानुसार अन्य सदस्यों / ट्रस्टियों को मनोनीत कर सकेगा तथा अन्य ट्रस्टियों को कार्यभार ग्रहण करायेगा ।
3. ट्रस्ट अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिये विभिन्न संस्थाओं का संचालन करेगा । संस्थाओं के संचालन के लिये दान, चन्दा औऱ अनुदान प्राप्त करने के लिये अधिकृत होगा ।
4.यहकि ट्रस्ट द्वारा संचालित प्रत्येक संस्था के लिये एक प्रबन्धकारिणी समिति होगी जो कि संस्था के संचालन के लिये आवश्यक सम्बद्धता / मान्यता अथारिटीज उत्तर प्रदेश सरकार/भारत सरकार द्वारा संबंधित संस्थाओं के नियमों के अनुकूल एक प्रबन्धकारिणी समिति का गठन करेगा ।
5. यह कि ट्रस्ट के सभी महत्वपूर्ण कार्य जैसे न्यायालय प्रकरण, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों से संबंधित लेन देन, निर्माण मान्यता, सम्बद्धता आदि आपसी सहमति से प्रमुख ट्रस्टी करेंगे। किसी महत्वपूर्ण निर्णय अथवा आपातकालीन समस्या के लिये आपातकालीन बैठक प्रमुख ट्रस्टी द्वारा आहूत की जायेगी । यदि किसी विषय पर मतभेद हो जाता हैतो ऐसी स्थिति में प्रमुख ट्रस्टी का निर्णय सर्वमान्य होगा ।
6. यह कि प्रमुख ट्रस्टी समय समय पर सामाजिक, धार्मिक, व पारमार्थिक कार्यो के प्रबंध एवं संचालन हेतु अपने विवेक के अनुसार प्रबन्ध समिति जिसमें वे स्वंय व उनमें से एक या अधिक ट्रस्टी तथा अन्य व्यक्ति अथवा व्यक्तियों को नियुक्त करने का अधिकार होगा एवं ट्रस्टी ऐसी प्रबन्ध समिति को संबंधित कार्यो, उद्देश्यों के संचालन व पूर्ति के लिये जो अधिकार ट्रस्टी जिसे उचित समझें प्रदान करने की शक्ति होगी ।
7. यह कि प्रमुख ट्रस्टी को ट्रस्ट तथा उसके उद्देश्यों से संबंधित कार्य हेतु किसी भी एजेंट जिसमें बैंक भी शामिल है को नियुक्त करने तथा उसे धनराशि अदा करने का तथा ट्रस्ट में निहित शक्तियों का प्रयोग करने का पूर्ण अधिकार होगा ।
8. यह कि ट्रस्ट की बैठक साल में कम से कम दो बार अवश्य होगी परंतु ट्रस्टी द्वारा 7 दिन पूर्व प्रस्तावित बैठक के विषय की सूचना देकर ट्रस्ट की बैठक बुलाने का अधिकार होगा और ट्रस्ट की बैठक साधारणतः कार्यालय में होगी परंतु मुख्य ट्रस्टी को अन्य स्थान पर आवश्यकतानुसार जहाँ उचित समझें बैठक बुलाने का भी अधिकार होगा ।
9. यह कि ट्रस्ट के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कहीं भी चल व अचल संपत्ति किन्ही भी शर्तों पर जो प्रमुख ट्रस्टी निश्चित करेगा तथा ट्रस्ट के उद्देश्यों के विपरीत न हो को प्राप्त करने व धारण करने चाहे पूर्ण स्वामित्व में हो या लीज पर हो किराये पर हो या क्रय करने या किसी और अन्य तरीके से प्राप्त करने, क्रय करने, विक्रय करने, किराये पे देने, हस्तान्तरण करने तथा अन्य प्रकार से अधिकार त्यागने का पूर्ण अधिकार होगा, परंतु ट्रस्टी को ट्रस्ट के नाम से तथा उद्देश्यों से रिक्त होने का अधिकार नहीं होगा ।
10.यह कि उक्त ट्रस्ट के व्यवस्थापक द्वारा व्यवस्था संचालित संस्थाओं से अपने तकनीकी कौशल के अनुसार पारिश्रमिक व लाभ प्राप्त करने के अधिकारी होंगे । उक्त व्यवस्थापक की मृत्यु के बाद उनकी संतान अथवा कानूनी वारिस पद, पारिश्रमिक व लाभ प्राप्त करने के अधिकारी होंगे और यह सिलसिला आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा ।
11. यह कि ट्रस्ट के नाम से चालू खाता, सावधि खाता, बचत खाता, व सभी प्रकार के बैंकिग खाते किसी भी संस्था बैंक, पोस्ट आफिस बैंक जो कि बैंकिग का व्यवसाय करती हों में खोल और रख सकते हैं । उक्त सभी बैंकिग एकाउन्टस खातों व अन्य सभी ट्रस्ट के खातों का संचालन प्रमुख ट्रस्टी के हस्ताक्षर द्वारा होगा ।
12. यह कि प्रमुख ट्रस्टी को अन्य ट्रस्टी रखने एवं सदस्य बनाने तथा उनको हटाने का अधिकार होगा । ट्रस्ट के नाम नियम एवं उद्देश्यों में परिवर्तन करने का अधिकार भी प्रमुख ट्रस्टी को होगा । प्रमुख ट्रस्टी एवं ट्रस्टी की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी क्रमशः उक्त प्रमुख ट्रस्टी एवं ट्रस्टी होंगे और यह सिलसिला आगे भी ऐसा चलता रहेगा
13 यह कि प्रमुख ट्रस्टी को उक्त ट्रस्ट के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अथवा आवश्यक होने पर अन्य व्यक्तियों, संस्था अथवा किसी अधिकारी अथवा किसी अन्य के सहयोग से समस्त विधिक कार्य करने का पूर्ण अधिकार होगा ।
14. यहकि ट्रस्ट में किसी नई क्रियाकलाप को जोड़ने अथवा हटाने का अधिकार प्रमुख ट्रस्टी को होगा जो कि ट्रस्ट द्वारा गठित समिति द्वारा अनुमोदित किया जायेगा ।
15.यह कि प्रमुख ट्रस्टी को प्राप्ति व खर्चो का ट्रस्ट फंड एवं संपत्तियों का संपूर्ण उचित तरीके से बाजब्ता हिसाब रखेंगे और प्रतिवर्ष 31 मार्च को समाप्त होने वाले लेखा / आर्थिक वर्ष का वार्षिक आय व्यय का लेखा व आर्थिक चिट्ठा बनायेंगे जो प्रमुख ट्रस्टी द्वारा हस्ताक्षऱित किया जायेगा और अन्य ट्रस्टियों द्वारा अनुमोदित होगा तथा इसका आडिट चार्ट्ड एकाउंटेट द्वारा कराया जायेगा ।
16. यहकि प्रमुख ट्रस्टी की अनुपस्थिति में समस्त कार्य ट्रस्टी द्वारा लिखित रूप से मनोनीत किये गये सदस्यों / व्यक्तियों द्वारा निष्पादित किया जायेगा जो लिखित होगा ।
17. यह कि प्रमुख ट्रस्टी को यह अधिकार होगा कि वह अपना उत्तराधिकारी वसीयत के अनुसार निश्चित कर सके । प्रमुख ट्रस्टी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को ट्रस्ट पर ट्रस्ट की संपत्तियों पर या ट्रस्ट की सदस्यता पर किसी भी प्रकार का अधिकार न होगा । ट्रस्टी / न्यासी द्वारा अपने उत्तराधिकारी का नामांकन कराया जायेगा । जो कि उक्त न्यासी ट्रस्टी की मृत्यु होने पर या अक्षम अथवा अनुपयुक्त होने पर उक्त न्यासी / ट्रस्टी के स्थान पर न्यासी / ट्रस्टी होगा तथा नवनियुक्त ट्रस्टी को एतदद्वारा नियुक्त ट्रस्टी के समान ही कार्य करने का अधिकार एवं दायित्व होगा ।
18 ट्रस्ट की सभी बैठकों की तिथियों को निर्धारित करना एवं अध्यक्षता करना, ट्रस्ट की बैठक समय से बुलाने व ट्रस्ट को सुचारू रूप से संचालन करने के लिये ट्रस्ट को निर्देश व सहयोग प्रदान करना । ट्रस्ट के दैनिक कार्यकलाप को सुचारू रूप से संचालित करना ट्रस्ट की सभी चल व अचल संपत्तियों का पूर्ण विवरण रख उनकी सुरक्षा करना । ट्रस्ट के लिये ट्रस्ट के नाम से कानूनी कार्यवाही करना । ट्रस्ट की ओर से समस्त बिल बाउचरों पर हस्ताक्षर करना, वेतन वितरण एवं वेतनवृद्धि, पदोन्नति निलंबन, कर्मचारियों के नियुक्ति । ट्रस्ट की समस्त आय व व्यय को सत्यापित कर, पदच्चुत करना ट्रस्ट की बैठकों में पारित समस्त प्रस्ताव व आदेशों को अनुमोदित करना ।
19. यहकि प्रमुख ट्रस्टी को विषयों पर विचार विमर्श एवं सलाह प्राप्त करने हेतु बोर्ड आफ ट्रस्टीज का गठन करेगा जिसमें अधिकमत 15 सदस्य होंगे ।
20. यहकि प्रमुख ट्रस्टी किसी भी व्यक्ति को ट्रस्टी मनोनीत करते समय उसका कार्यकाल स्पष्ट करेगा, प्रमुख ट्रस्टी किसी भी व्यक्ति को कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व ही बिना किसी को कोई कारण बताये ट्रस्टी पद से हटा सकता है ।
21. यहकि प्रमुख ट्रस्टी जबभी उचित समझे बोर्ड आफ ट्रस्टीज की बैठक आयोजित कर सकता है जिसकी अध्यक्षता प्रमुख ट्रस्टी स्वंय करेगा ।
22. यहकि बोर्ड आफ ट्रस्टी उन्हीं विषयों पर विचार करेगा तथा सुझाव देगा जिनको बोर्ड आफ ट्रस्टीज के समक्ष विचाह हेतु प्रस्तुत किया जायेगा ।
बैंक एकाउन्ट-
1. ट्रस्ट अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू मंदिर जीर्णोधार समिति का खाता प्रमुख ट्रस्टी और बोर्ड आफ ट्रस्टीज द्वारा नामित एक व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से (संयुक्त खाता /Joint A/c) किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक से खोला जा सकेगा तथा ट्रस्ट के आवश्यकतानुसार संयुक्त रूप से संचालित किया जायेगा ।
2. ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित अथवा कार्यरत किसी भी विद्यालय / महाविद्यालय / संस्थान / क्रेन्द्र / कार्यक्रम इकाई कार्यालय का पृथक नाम से बैंक खाता खोला एवं संचालित किया जा सकता है ।
विधिक कार्यवाही
यदि ट्रस्ट अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू मंदिर जीर्णोधार समिति की तरफ से कोई भी विधिक कार्यवाही की जाती है या उसके विरूद्ध कोई विधिक कार्यवाही होती है तो प्रमुख ट्रस्टी अन्य ट्रस्टियों की सलाह से किसी अधिवक्ता की नियुक्ति एवं विभिन्न न्यायालयों में पैरवी हेतु किसी को अधिकृत कर सकता है ।
प्रमुख ट्रस्टी
सभी बैठक को समयानुसार व प्रमुख ट्रस्टी के आदेशानुसार बुलाना सभी बैठकों की बैठक कार्यवाही रजिस्टर में लिखना कार्यवाही का विवरण, ट्रस्ट की समस्त आय-व्यय का हिसाब रखना व उसको आडिट करना । ट्रस्ट का समस्त व्यय जो कि अधिकृत ट्रस्टी द्वारा सत्यापित हो उनको अनुमोदित करना । इस कार्य में अन्य ट्रस्टियों का पूरा सहयोग एवं परामर्श से होगा ।